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वृद्धजन बोझ नहीं हमारे अनुभव के स्तंभ हैं : न्यायाधीश

*धनबाद :* वृद्धजन समाज की धरोहर हैं, और उनका सम्मान तथा देखभाल करना हम सबकी जिम्मेदारी है।माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 इसी उद्देश्य से बनाया गया है। उपरोक्त बातें सोमवार को सिविल कोर्ट धनबाद में वृद्धजनों के लिए आयोजित जागरूकता शिविर में अवर न्यायाधीश सह सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकार मयंक तुषार टोपनो ने कही। उन्होंने कहा कि वृद्धजन बोझ नहीं, हमारे अनुभव का खजाना हैं। उन्होंने विधि स्वयंसेवकों को कहा कि हम यह सुनिश्चित करें कि कोई भी अनपढ़ या असहाय बुजुर्ग अपने अधिकारों से वंचित न रहे, और उन्हें समय पर न्याय तथा आर्थिक सहायता मिल सके। कानून के विषय में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत हर माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक को यह अधिकार है कि उनके बच्चे या परिवार के सदस्य उनकी भोजन, दवा, रहने और अन्य जरूरी खर्चों की जिम्मेदारी निभाएँ।
लेकिन हमारे समाज में अनेक वृद्धजन ऐसे हैं, जो अनपढ़ हैं, आर्थिक रूप से कमजोर हैं, और अपने अधिकारों के बारे में जान नहीं पाते। उन्हें सहायता की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है। इसलिए यह हमारा कर्तव्य है कि हम ऐसे वृद्धजनों को आगे बढ़ाकर इस कानून के तहत भरण-पोषण भत्ता/राशि दिलाने में मदद करें।इस अधिनियम के अनुसार वृद्धजन स्वयं या किसी प्रतिनिधि के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं, और अदालत या ट्रिब्यूनल 90 दिनों के भीतर भरण-पोषण राशि तय करता है। इसका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें सम्मान और सुरक्षा प्रदान करना है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ऐसे सभी वृद्ध नागरिकों को पूरी तरह मुफ़्त कानूनी सहायता प्रदान करता है।
वृद्धजन हमारे अनुभव और संस्कार के आधार स्तंभ हैं। हम यह सुनिश्चित करें कि कोई भी वरिष्ठ नागरिक, खासकर अनपढ़ या अकेला बुजुर्ग, भरण-पोषण के अपने अधिकार से वंचित न रहे, और उन्हें डालसा के माध्यम से पूरा न्याय और सहायता मिल सके।
इस मौके पर सोलह वरिष्ठ नागरिको को मौके पर वृद्धा पेंशन मुहैया कराया गया. कार्यक्रम में लीगल एंड डिफेंस काउंसिल सिस्टम धनबाद के चीफ कुमार विमलेंदू ,डिप्टी चीफ अजय कुमार भट्ट, नीरज कुमार गोयल, सुमन पाठक शैलेन्द्र झा, कन्हैयालाल ठाकुर, मुस्कान चोपड़ा,स्वाति कुमारी समेत प्राधिकरण के सभी विधिक स्वयंसेवक व दर्जनों लोग उपस्थित थे.

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